लोक भारती विश्वविद्यालय, सनोसरा (भावनगर) यह दर्शाता है कि शिक्षा, देशी नस्लें और स्थिरता किस तरह सामंजस्य में आ सकती हैं। ग्रामीण वातावरण के बीच स्थित इसका परिसर सिर्फ युवाओं को ही नहीं, बल्कि भारत की उत्कृष्ट देशी गाय सम्पदा – भव्य गिर गौमाता और कांकरेज गौमाता – का भी पालन-पोषण करता है। इनके यहां होने से विश्वविद्यालय की भारतीय ग्रामीण परंपराओं के प्रति गहरी श्रद्धा और स्वास्थ्य, कृषि और पारिस्थितिकी में देशी गायों की महत्वपूर्ण भूमिका झलकती है।
लोक भारती में गिर गौमाता और कांकरेज गौमाता बेहतरीन गुणवत्ता की हैं, जिन्हें स्नेह और वैज्ञानिक समझ के साथ पाला जाता है। छात्रों को इन देशी नस्लों के करीब से अवलोकन, उनके गुणों को समझने और दूध, खेती और मिट्टी की सेहत में उनके योगदान को जानने का दुर्लभ अवसर मिलता है। यह व्यावहारिक अनुभव पाठ्यपुस्तकों को वास्तविक ग्रामीण नवाचार से जोड़ता है।
इसके अलावा, लोक भारती ने अपने परिसर में गोबर गैस प्लांट स्थापित किया है, जो गोबर को स्वच्छ ऊर्जा के बहुमूल्य स्रोत में बदलता है। यह न केवल अपशिष्ट प्रबंधन में मदद करता है, बल्कि पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता भी कम करता है, जिससे परिसर आत्मनिर्भर और अधिक पर्यावरण-संवेदी बनता है। प्लांट के उत्पाद, जैसे स्लरी, जैविक खाद के रूप में मिट्टी को समृद्ध करते हैं और परिसर के आसपास सतत कृषि का समर्थन करते हैं।
ऐसी पहलों के माध्यम से, लोक भारती विश्वविद्यालय परंपरागत ज्ञान और आधुनिक शिक्षा को साथ-साथ चलने का बेहतरीन उदाहरण पेश करता है। गिर और कांकरेज गौमाता का गोबर गैस जैसी अक्षय ऊर्जा पहल में समावेश छात्रों को समग्र ग्रामीण विकास, परिपत्र अर्थव्यवस्था और जलवायु-अनुकूल जीवनशैली के बारे में सोचने को प्रेरित करता है। यह सभी के लिए उत्सव और अनुकरण योग्य मॉडल है, जो प्रकृति, संस्कृति और सततता में आधारित भविष्य में विश्वास रखते हैं।
लोक भारती विश्वविद्यालय सिर्फ गिर और कांकरेज गौमाता और गोबर गैस संयंत्र के लिए ही नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और नवाचार के चारों ओर फैले अपने व्यापक शैक्षिक इकोसिस्टम के लिए भी खास है। लोक भारती के तले छात्र सिर्फ कक्षा में ही नहीं, बल्कि मिट्टी, पशु, स्थानीय समुदाय और टिकाऊ तकनीकों के प्रत्यक्ष संपर्क में भी सीखते हैं। “शिक्षण + साधना + सेवा” के इस संयोजन से परिसर एक जीवंत ग्रामीण विकास प्रयोगशाला जैसा महसूस होता है।
देशी पशुओं और अक्षय ऊर्जा पर विशेष ध्यान देने के अलावा, लोक भारती ग्रामीण अध्ययन, प्राकृतिक खेती, कृषि प्रसंस्करण, पशुपालन, डेयरी विज्ञान आदि में कई कार्यक्रम देता है। छात्र जैविक खेती, मूल्य वर्द्धन और समुदाय केंद्रित उद्यमिता में व्यावहारिक कौशल प्राप्त करते हैं, जिससे वे सिर्फ शहर में नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि गांवों में बदलाव लाने वाले बनें। किसान, एनजीओ और स्थानीय संस्थाओं के साथ कार्यशालाएं, फील्ड डेमो और लाइव्ह प्रोजेक्ट्स इस शिक्षा को और भी गहरा बनाते हैं।
इस शैक्षिक छाते के तहत लोक भारती सादगी, सामाजिक जिम्मेदारी, पर्यावरण संवेदनशीलता और भारतीय संस्कृति के सम्मान जैसे मूल्यों को भी पोषित करता है। गिर और कांकरेज गायों की उपस्थिति, गोबर गैस का उपयोग और व्यावहारिक ग्रामीण पाठ्यक्रम एक शक्तिशाली संदेश देते हैं – वास्तविक शिक्षा केवल डिग्रियों की बात नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना और अपने आस-पास की समुदायों को ऊपर उठाना है।
गव्यसिद्ध अमिताभ AK भटनागर
निदेशक, ग्लोबल कन्फेडरेशन ऑफ काउ बेस्ड इंडस्ट्रीज, राजकोट (गुजरात)
निदेशक, गौ विश्व विद्यापीठम, गांधीनगर (गुजरात)
